द्वापर युग में भीष्म पितामह जी ने भी लंबे समय तक सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा की थी कि कब वह शुभ अमावस्या का अवसर आए, तब वे अपने प्राणों का त्याग करें। आज सोमवती अमावस्या का पावन अवसर है, जो अत्यंत पुण्यदायक माना गया है। हम सभी का सौभाग्य है कि ऐसे शुभ अवसर पर श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा श्रवण कर रहे हैं।
कथा श्रवण करने से पितृगण भी निश्चित रूप से कल्याण और मोक्ष को प्राप्त करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण अपने भक्तों पर विशेष कृपा करते हैं, उन्हें अपने चरणों में स्थान प्रदान करते हैं।
भगवान श्रीकृष्ण को गौमाता से अत्यंत प्रेम था। हमें भी इस बात से प्रेरणा लेकर गौसेवा और धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। आप सभी श्रद्धालुओं को विश्वास दिलाता हूँ कि भगवान की कृपा अवश्य प्राप्त होगी।

