आयुष्मान कार्ड प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना :लम्बे समय से घुटना से पीड़ित गयाराम का हुआ घुटना का नि:शुल्क ऑपरेशन योजना के लिए प्रधानमंत्री को दिया धन्यवाद…

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आयुष्मान कार्ड प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना :

 बेमेतरा 22 फ़रवरी 2024: 71 वर्ष के श्री गयाराम साहू लम्बे समय से घुटना की समस्या से पीड़ित थे। उन्होंने घुटने की पीड़ा से निजात पाने स्थानीय स्तर पर कई चिकित्सकों को के अलावा आयुर्वेद की दवा ली। पर पीड़ा कम होने का नाम नहीं ले रही थी।प्राइवेट अस्पताल भी 2 से 4 लाख रुपये का खर्च बता रहे थे । जिसका वह वहन करने की स्थिति में नहीं थे।

उन्हें ज़िला अस्पताल बेमेतरा में दिखाया। जहां 22 फ़रवरी को श्री गयाराम साहू का घुटना प्रत्यारोपण का आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना अंतर्गत नि:शुल्क सफल ऑपरेशन आर्थो सर्जन डॉ. शिल्प वर्मा ने किया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी व सिविल सर्जन डॉ. संत राम चुरेन्द्र के मार्गदर्शन में हुआ। इस कार्ड के तहत आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों को 5 लाख तक मुफ्त इलाज की सुविधा प्रदान की जाती है। श्री सियाराम साहू को ऑपरेशन के बाद वाकर के सहारे चहल-कदमी करायी गयी। डॉ.वर्मा ने बताया कि श्री सियाराम ठीक है। कुछ हल्के व्यायाम और दवाई की ज़रूरत है।*

*श्री साहू ने इस हितकारी योजना के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया। आयुष्मान भारत योजनांतर्गत कार्ड से मेरा नि:शुल्क घुटने का ऑपरेशन हुआ, जिससे मुझे अपने ईलाज में आर्थिक सहयोग मिला। उन्होंने कहा कि मेरा सौभाग्य है कि घुटने का ऑपरेशन 21 फ़रवरी को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के जन्मदिन पर हुआ। यह ख़ुशी की बात है। इसे ताउम्र याद रखूँगा। उन्होंने मुख्यमंत्री को जन्मदिन की बधाई और शुभकामना दी। वर्तमान में श्री साहू दुर्ग में निवास करते है।*

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ संत राम चुरेन्द्र ने अपील किया कि कि ऐसे ए0पी0एल0 एवं बी0पी0एल0 राशन कार्डधारी परिवारों जिन्होने अपना आयुष्मान कार्ड (ई-कार्ड) नहीं बनवाया हैं, अतिशीघ्र अपना व अपने परिवार के सदस्यों का आयुष्मान कार्ड (ई-कार्ड) बनवाये। जिससे कि उन परिवार अथवा परिवार के सदस्यों को अपने राशनकार्ड के अनुसार स्वास्थ्य सहायता की पात्रता की जानकारी भलीभांति हो सके एवं आपात स्थिति में परिवार या सदस्य, स्वयं आसानी से निर्णय ले सकें कि उन्हें किस श्रेणी के पंजीकृत अस्पताल (शासकीय/निजी) में ईलाज प्राप्त करना हैं, साथ ही उन्हें ईलाज में होने वाले आर्थिक व्यय का भय भी ना हो।

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