
सरकार के अनुसार, इन अनियमितताओं के कारण सैकड़ों किसान समय पर नकद ऋण, खाद और बीज जैसी आवश्यक सुविधाओं से वंचित हो गए थे। इससे कृषि कार्य प्रभावित होने के साथ-साथ किसानों में नाराजगी भी बढ़ रही थी।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रभावित शाखाओं से जुड़े करीब 497 किसानों की शिकायतों में 30 करोड़ 51 लाख रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितता सामने आई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक प्रशासन और राज्य सरकार ने दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। साथ ही विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। सूत्रों के मुताबिक, कई कर्मचारियों को निलंबित किया जा चुका है, जबकि अन्य संबंधित मामलों की जांच जारी है।किसानों को राहत पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने त्वरित कार्ययोजना तैयार की है। संबंधित समितियों को पात्र किसानों की सूची तैयार कर मुख्यालय भेजने के निर्देश दिए गए हैं। सूची प्राप्त होते ही ऋण स्वीकृति और वितरण की प्रक्रिया तेज की जा रही है, ताकि किसानों को आगामी कृषि सीजन के लिए समय पर खाद, बीज और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने कहा कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता किसानों को हर संभव सुविधा उपलब्ध कराना और उनकी कृषि गतिविधियों को निर्बाध बनाए रखना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों के हितों के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

