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सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसी को मामले में नियमित आपराधिक प्रकरण दर्ज कर जांच तेज गति से पूरी करने को कहा है। जांच की प्रगति रिपोर्ट 13 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई में पेश करनी होगी।जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए CBI को श्रवण की हिरासत में हुई मौत के कारणों की पड़ताल करने के निर्देश दिए। अदालत ने जांच की जिम्मेदारी वरिष्ठ अधिकारी को सौंपने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जांच में हिरासत के दौरान हिंसा के लिए कोई अधिकारी जिम्मेदार पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।अदालत ने उन छत्तीसगढ़ के अधिकारियों की भूमिका की जांच के निर्देश भी दिए हैं, जिन पर न्यायिक जांच के निष्कर्ष सामने आने के बावजूद आवश्यक कार्रवाई नहीं करने का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पूरे मामले की परिस्थितियों और तथ्यों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। मृतक के परिवार को राहत देते हुए अदालत ने 25 लाख रुपये अंतरिम मुआवजे के तौर पर देने का आदेश दिया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि यह अंतिम मुआवजा नहीं होगा। मामले की आगे की कार्यवाही और तथ्यों के आधार पर अंतिम राशि निर्धारित की जा सकती है।
यह मामला मृतक की पत्नी लहरा बाई तामरे और उनकी बेटियों संध्या तथा साक्षी की याचिका से सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। याचिकाकर्ताओं ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के 3 अक्टूबर 2024 के फैसले को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने हिरासत में हुई मौत के मामले में परिवार को एक लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था। हालांकि FIR दर्ज करने और मौत के कारणों की विस्तृत जांच के संबंध में कोई निर्देश नहीं दिया गया था