महासमुंद गैस घोटाले का मास्टरमाइंड निकला जिला खाद्य अधिकारी!

www.khabarwala.news

schedule
2026-05-09 | 17:57h
update
2026-05-09 | 18:04h
person
khabarwala.news
domain
khabarwala.news
महासमुंद गैस घोटाले का मास्टरमाइंड निकला जिला खाद्य अधिकारी!

  •  1.5 करोड़ की LPG हेराफेरी में बड़ा खुलासा, 50 लाख लेकर रची गई पूरी साजिश,
  • खाद्य मंत्री बोले- अफ़सर पर होगी सख्त कार्रवाई, एक भी दोषी नहीं बख्शा जाएगा!

विशेष संवाददाता

रायपुर। महासमुंद में सामने आया एलपीजी गैस गबन कांड अब प्रदेश के सबसे बड़े प्रशासनिक घोटालों में गिना जा रहा है। जिस अधिकारी पर सरकारी जब्त संपत्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, वही करोड़ों की गैस हेराफेरी का मुख्य षड्यंत्रकारी निकला। महासमुंद पुलिस ने जिला खाद्य अधिकारी अजय कुमार यादव सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे नेटवर्क का सनसनीखेज खुलासा किया है। खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने मामले में अफसर के खिलाफ विभागीय जांच बैठाने के साथ सभी दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की घोषणा की है।

पुलिस जांच में सामने आया है कि सिंघोड़ा पुलिस द्वारा दिसंबर 2025 में जब्त किए गए 6 एलपीजी गैस कैप्सूलों को सुरक्षित रखने के नाम पर करोड़ों की गैस गायब कर दी गई। जांच के अनुसार करीब 1.5 करोड़ रुपये की एलपीजी गैस के गबन की पटकथा पहले से लिखी जा चुकी थी।

कैसे शुरू हुआ पूरा खेल

भीषण गर्मी और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पुलिस अधीक्षक द्वारा कलेक्टर को पत्र लिखा गया था, जिसके बाद गैस से भरे 6 कैप्सूल ट्रकों को सुरक्षित स्थान पर रखने की प्रक्रिया शुरू हुई।

30 मार्च 2026 को खाद्य विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में इन कैप्सूलों को ठाकुर पेट्रो कैमिकल्स को सुपुर्द कर दिया गया। लेकिन जांच में खुलासा हुआ कि सुपुर्दनामा सिर्फ एक बहाना था। असली खेल गैस निकालकर उसे बेचने का था।

23 मार्च को हुई पहली षड्यंत्रकारी बैठक

जांच के मुताबिक 23 मार्च को जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव और गौरव गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर के बीच पहली गुप्त बैठक हुई। इसी बैठक में 1 करोड़ रुपये के गबन की योजना तैयार हुई। पंकज चंद्राकर को पूरे ऑपरेशन का क्रियान्वयन सौंपा गया, जबकि रायपुर के मनीष चौधरी को बाहरी एजेंसियों से संपर्क कर डील फाइनल कराने की जिम्मेदारी दी गई।

थाना पहुंचकर किया गैस का “मूल्यांकन”

26 मार्च को अजय यादव और पंकज चंद्राकर खुद सिंघोड़ा थाना पहुंचे और 6 कैप्सूलों में मौजूद गैस का अनुमान लगाया। करीब 105 मीट्रिक टन गैस होने का आंकलन किया गया और उसी दिन करोड़ों की डील पर मुहर लग गई। उसी रात 11 बजे एक गैस एजेंसी संचालक के साथ बैठक हुई, लेकिन उसने शामिल होने से इनकार कर दिया। बाद में ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के साथ 80 लाख रुपये में डील फाइनल हुई।

Advertisement

50 लाख सीधे अधिकारी के घर!

जांच में सामने आया है कि सुपुर्दनामा के दूसरे ही दिन यानी 31 मार्च को 50 लाख रुपये जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव तक पहुंचाए गए। बाकी रकम की व्यवस्था बाद में की गई। बताया जा रहा है कि मनीष चौधरी ने 10 लाख रुपये अपने हिस्से में रखे जबकि 20 लाख रुपये पंकज चंद्राकर को मिले।

गैस ही नहीं, दस्तावेजों में भी खेल

गैस निकालने के बाद खाली कैप्सूलों का वजन कराया गया और फर्जी पंचनामा तैयार किया गया।सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पंचनामा में वही लोग “स्वतंत्र गवाह” बने जो खुद पूरे षड्यंत्र के आरोपी हैं। जांच में यह भी सामने आया कि दस्तावेज दोपहर में कलेक्टोरेट पहुंच गए थे, जबकि वजन प्रक्रिया रात 8 बजे के बाद हुई थी। इससे कूटरचना और दस्तावेजी फर्जीवाड़े की पुष्टि मानी जा रही है।

ढाबे में बनी बचाव की रणनीति

20 अप्रैल की रात आरंग के एक ढाबे में आरोपियों की बैठक हुई। वहां पुलिस पर पूरा मामला डालने और एक जैसे बयान देने की रणनीति बनाई गई थी। लेकिन पुलिस जांच, मोबाइल डाटा और आर्थिक लेनदेन ने पूरा खेल उजागर कर दिया।

गिरफ्तार आरोपी

  • 1.अजय कुमार यादव – जिला खाद्य अधिकारी
  • 2. पंकज चंद्राकर – गौरव गैस एजेंसी संचालक
  • 3. मनीष चौधरी – कथित बिचौलिया और डील मैनेजर

पुलिस ने क्या-क्या किया जब्त

  • मोबाइल फोन
  • नगदी रकम
  • लाखों के घरेलू सामान
  • संदिग्ध बैग और दस्तावेज

कुल जब्त संपत्ति लगभग 6.11 लाख रुपये बताई गई है।

लगीं गंभीर धाराएं

आरोपियों पर आपराधिक न्यास भंग, आपराधिक षड्यंत्र, कूटरचना, सरकारी संपत्ति की हेराफेरी और कालाबाजारी सहित बीएनएस और ईसी एक्ट की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

अब सरकार भी एक्शन मोड में

महासमुंद गैस गबन कांड पर प्रदेश के खाद्य मंत्री दयालदास बघेल का बयान भी सामने आया है। मंत्री बघेल  ने खबरवाला से विशेष बातचीत में कहा है कि ऐसी घटना दोबारा न हो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही खाद्य विभाग अपने स्तर पर अलग से जांच करेगा।

त्वरित टिप्पणी :

गैस घोटाले ने सिस्टम की सच्चाई उजागर कर दी : गंगेश द्विवेदी

महासमुंद का एलपीजी गैस गबन मामला अब सिर्फ भ्रष्टाचार या चोरी की सामान्य घटना नहीं रह गया है। यह मामला सरकारी सिस्टम के भीतर बैठे उस खतरनाक गठजोड़ को उजागर करता है, जहां सुरक्षा के नाम पर सरकारी संपत्ति को ही सौदेबाजी का सामान बना दिया गया। जिस तंत्र को जब्त गैस की सुरक्षा करनी थी, उसी तंत्र के जिम्मेदार चेहरों पर करोड़ों की हेराफेरी के आरोप लगना बेहद गंभीर और शर्मनाक है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इतना बड़ा खेल सिर्फ तीन लोगों के बूते हो सकता है, या फिर इसके पीछे पूरा संगठित नेटवर्क काम कर रहा था?

जब पुलिस ने गैस से भरे कैप्सूल जब्त किए थे, तब उनकी निगरानी और सुरक्षा की जवाबदेही आखिर किसकी थी? क्या जिला खाद्य अधिकारी अकेले इतनी बड़ी साजिश को अंजाम दे सकते थे? सुपुर्दनामा देने से पहले गैस की वास्तविक मात्रा का वैज्ञानिक और आधिकारिक सत्यापन क्यों नहीं कराया गया? जिन लोगों पर बाद में गबन का आरोप लगा, उन्हें ही पूरी प्रक्रिया में शामिल क्यों किया गया? 50 लाख रुपये आखिर किस चैनल से पहुंचे और किन लोगों की मौजूदगी में यह लेनदेन हुआ? क्या विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी इस खेल का हिस्सा थे? फर्जी वजन पंचनामा तैयार करने में किन-किन लोगों ने भूमिका निभाई? जब वजन रात में हुआ तो दस्तावेज दोपहर में कलेक्टोरेट कैसे पहुंच गए? क्या सरकारी रिकॉर्ड में पहले से हेराफेरी की पटकथा लिखी जा चुकी थी? क्या इस पूरे घोटाले को राजनीतिक संरक्षण भी हासिल था? करोड़ों की गैस आखिर कहां खपाई गई और किन लोगों तक पहुंची? क्या सिर्फ तीन गिरफ्तारियों से पूरा सच सामने आ जाएगा या असली चेहरे अब भी बचाए जा रहे हैं?विभागीय जांच बड़े अधिकारियों तक पहुंचेगी या मामला निचले स्तर पर ही दफना दिया जाएगा? अगर पुलिस सक्रिय नहीं होती तो क्या यह पूरा खेल हमेशा के लिए फाइलों में दब जाता? एक अहम सवाल—अगर सरकारी जब्त संपत्ति ही सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता आखिर किस सिस्टम पर भरोसा करे?  महासमुंद का यह गैस घोटाला सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि प्रशासनिक नैतिकता पर लगा गहरा दाग है। अब जनता जवाब चाहती है, कार्रवाई नहीं बल्कि पूरी सच्चाई चाहती है। क्योंकि इन सवालों के जवाब सिर्फ महासमुंद नहीं, पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता तय करेंगे।

Advertisement

Imprint
Responsible for the content:
khabarwala.news
Privacy & Terms of Use:
khabarwala.news
Mobile website via:
WordPress AMP Plugin
Last AMPHTML update:
15.07.2026 - 07:04:18
Privacy-Data & cookie usage: