ग्रीष्म ऋतु में लू-तापघात के प्रकोप से बचाव हेतु विभाग प्रमुखों को दिशा-निर्देश जारी… – www.khabarwala.news

ग्रीष्म ऋतु में लू-तापघात के प्रकोप से बचाव हेतु विभाग प्रमुखों को दिशा-निर्देश जारी…

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ग्रीष्म ऋतु में लू-तापघात के प्रकोप से बचाव हेतु विभाग प्रमुखों को दिशा-निर्देश जारी…
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गौरेला पेण्ड्रा मरवाही, 27 मार्च 2025: कलेक्टर श्रीमती लीना कमलेश मंडावी ने भारत सरकार गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण नई दिल्ली द्वारा लू-तापघात से बचाव के लिए आवश्यक तैयारी के संबंध में जारी किए गए दिशा-निर्देशों के तहत ग्रीष्म ऋतु में लू के प्रकोप से बचाव हेतु सभी विभाग प्रमुखों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जारी परिपत्र में स्वास्थ्य, पशु, चिकित्सा, श्रम एवं रोजगार विभाग एवं अन्य विभागों से संबंधित दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन करने के साथ ही लू-तापघात से बचाव हेतु दिशा-निर्देशों को तहसील एवं ग्राम पंचायत स्तर पर शिक्षकों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, पंचायत सचिवों, कोटवारों एवं अन्य मैदानी अमलों के माध्यम से जनसमुदाय में जमीनी स्तर पर प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जिले में लू-तापघात से तैयारी एवं बचाव हेतु अपर कलेक्टर श्रीमती नम्रता आनंद डोंगरे मोबाईल +91-9617845121 को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।

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जिले में बढ़ते हुये तापमान को ध्यान में रखते हुए लू-तापघात के प्रकोप से बचाव हेतु आम नागरिकों से कहा गया है कि लू-तापघात के लक्षण दिखाई देते ही निकट के अस्पताल में संपर्क कर आवश्यक दवा का उपयोग सुनिश्चित करें। बचाव के उपाय करें। ग्रीष्म ऋतु में लू लगने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती है। वृद्ध, बच्चे, खिलाड़ी, धूप में काम करने वाले श्रमिक सर्वाधिक खतरे में रहते हैं। पसीना न आना, गर्म-लाल एवं शुष्क त्वचा, मतली, सिरदर्द, थकान, चक्कर आना, उल्टियां होना, बेहोश हो जाना एवं पुतलियां छोटी हो जाना लू (तापघात) के प्रमुख लक्षण एवं संकेत हैं। गर्मी व लू से बचाव के लिए खूब पानी पिएं व खाली पेट न रहें, ठण्डे पानी से नहाएं, सर ढके व हल्के रंग के ढीले व पूरी बांह के कपड़े पहने, बच्चों को बंद वाहनों में अकेला न छोड़े, दिन में दोपहर 12 से शाम 3 बजे के मध्य बाहर जाने से बचें, धूप में नंगे पाँव न चलें, बहुत अधिक भारी कार्य न करें। बाहर निकलना आवश्यक हो तो छतरी व धूप के चश्मे का उपयोग करें, धूप में निकलने से पहले कम से कम दो गिलास पानी अवश्य पिएं, चक्कर व उल्टी आने पर छायादार स्थान पर विश्राम करें, बुखार व लू लगने पर निकट के अस्पताल में संपर्क कर आवश्यक दवा का उपयोग करें। ओआरएस का घोल, नारियल पानी, छाछ, लस्सी, नींबू पानी, फलों का रस इत्यादि का सेवन लाभदायक होता है।

कलेक्टर ने गर्मी एवं लू से बचाव तथा जनित रोगों के उपचार हेतु प्रत्येक स्वास्थ्य केन्द्रों में विशेष चिकित्सा दल का गठन कर लिखित में उनकी ड्यूटी लगाने, ओआरएस पैकेट एवं मौसम आधारित दवाईयों का भण्डारण सभी स्वास्थ्य केन्द्रों, आंगनबाड़ी केन्द्रों में तथा मितानीनों के पास आवश्यक रूप से उपलब्ध कराने, लू से पीडित मरीजों की संख्या बढ़ने की स्थिति में जिला चिकित्सालय तथा सिविल चिकित्सालय में अलग से चिकित्सा वार्ड की व्यवस्था करने तथा किसी व्यक्ति को लू लगने पर उसे तत्काल चिकित्सकीय सहायता प्रदान करने हेतु सार्वजनिक स्थलों पर एंबुलेंस, 108 को विशेषकर दोपहर में तैयार रखने के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश दिए हैं। इसी तरह सार्वजनिक स्थलों, बाजारों, कार्यालयों, औद्योगिक एवं अन्य क्षेत्र के कामगारों, मनरेगा श्रमिकों, भवन निर्माण में कार्यरत श्रमिकों, शैक्षणिक संस्थाओं, बस स्टैण्ड, धार्मिक स्थलों, वन क्षेत्रों एवं पर्यटन स्थलों में छाया एवं शीतल पेय जल की व्यवस्था करने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं।

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