आदिबद्री में खुद ब खुद धरती से फूटने लगी सरस्वती नदी की जलधारा! दर्शन करने पहुंचने लगे श्रद्धालु…

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आदिबद्री में खुद ब खुद धरती से फूटने लगी सरस्वती नदी की जलधारा! दर्शन करने पहुंचने लगे श्रद्धालु…

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यमुनानगर: नदियों को सनातन धर्म में विशेष दर्जा दिया गया है. सनातन धर्म ग्रंथों में भी नदियों का जिक्र देखने को मिलता है. हजारों सालों पहले से नदियों की पूजा होती आई है. आज भी नदियों को मां का दर्जा दिया जाता है और उसकी पूजा की जाती है. गंगा हों, यमुना हों या फिर सरस्वती नदी इनका इतिहास हजारों साल पुराना है.

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गंगा और यमुना नदी की आज भी सनातन धर्म में पूजा होती है. हालांकि, माना जाता है कि समय के साथ सरस्वती नदी विलुप्त हो गईं. लेकिन एक बार फिर यमुनानगर के आदि बद्री क्षेत्र में सरस्वती नदी की धारा खुद ब खुद धरती से फूटने की चर्चा है, जिसे सरस्वती का उद्गम स्थल माना जा रहा है. हरियाणा सरकार भी कड़ी मेहनत कर सरस्वती नदी को पुनः धरातल पर लाने के लिए प्रयास कर रही है.

5,500 साल पहले बहती थी सरस्वती नदी

सरस्वती नदी के अस्तित्व को शास्त्र, पुराण और विज्ञान सभी ने माना है. लगभग 5,500 साल पहले सरस्वती नदी हिमालय से निकलकर हरियाणा, राजस्थान व गुजरात के रास्ते से होते हुए अरब सागर में विलीन हो जाती थी. लेकिन समय बीतने के साथ-साथ यह भूमिगत हो गई, जिसे विलुप्त होना मान लिया गया था. अब ऐसा माना जा रहा है कि यमुनानगर के आदिबद्री क्षेत्र में सरस्वती नदी की धारा खुद ब खुद धरती से फूट रही है. वहीं, सरस्वती हेरिटेज डेवलपमेंट बोर्ड द्वारा युद्धस्तर पर सरस्वती नदी को पुनः धरातल पर लाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं और यह भी दावा किया जा रहा है कि इस नदी में करीब 180 किलोमीटर तक पानी चलने भी लगा है.

नदी के लिए गठित हुआ था बोर्ड

सेटेलाइट से ली गई तस्वीरों की मदद से सरस्वती नदी के रूट को ढूंढने के प्रयास कई साल पहले शुरू हो गए थे, जिसके चलते जहां से पहले सरस्वती नदी बहा करती थी, उसी रास्ते में पड़ने वाले यमुनानगर के आदिबद्री क्षेत्र में सरस्वती नदी का उद्गम स्थल मिला, जहां धरती से अपने आप जल फूट रहा है. नदी को पुनः धरातल पर लाने के लिए सरस्वती हेरिटेज डेवलपमेंट बोर्ड का गठन किया गया था, जिसके अध्यक्ष खुद हरियाणा के सीएम मनोहर लाल हैं.

आदिबद्री में बन रहा डैम

वहीं बोर्ड के उपाध्यक्ष धूमन सिंह किरमच का कहना है कि इसरो ने नदी के पैलियो चैनल सरस्वती बोर्ड को दिए हैं, तभी से आदिबद्री को सरस्वती का उद्गम स्थल माना जाता है. पैलियो चैनल में साफ नजर आ रहा है कि इस स जगह से वाकई में कभी सरस्वती बहती थी. धूमन ने बताया कि सरस्वती हेरिटेज ने इस नदी को सहेजने में भी बहुत बड़ा कार्य किया है. आदिबद्री में एक डैम और बैराज बनाया जा रहा है, जिससे सरस्वती में पूरे वर्ष जल रहेगा.

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