सेंदमुड़ा निवासी जयशंकर मरकाम हमारे रक्तदाता, जो बन चुके हैं जीवनदाता,अपने रक्त से दूसरों का जीवन सींच रहे है…

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सेंदमुड़ा निवासी जयशंकर मरकाम हमारे रक्तदाता, जो बन चुके हैं जीवनदाता,अपने रक्त से दूसरों का जीवन सींच रहे है…

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घनश्याम यादव /देवभोग -गरियाबंद @खबरवाला न्यूज :जब कोई अपना आईसीयू में हो और चिकित्सक शीघ्र रक्त की व्यवस्था करने को कहे तो कलेजा मुंह को आ जाता है। वहीं यह स्थिति अगर गरियाबंद जैसे जिले में हो तो हालत और खराब हो जाती है। 

रक्तदान के नाम से ही यूं ही लोग घबराते हैं।

ऐसे जरूरतमंद परिजन के लिए जयशंकर मरकाम मददगार बनकर सामने आते हैं। उन्होंने रक्तदान कर अब तक कई जिन्दगियां बचाई है। दुनिया में कुछ ऐसे लोग भी हैं जिन्हें दूसरों की जान बचाने का जुनून है। ये लोग अपने बहुमूल्य रक्त से लोगों की जान बचाते आ रहे हैं। वे निरंतर हर तीन महीने में रक्तदान करते हैं। एक तरह से ये अब जीवनदाता बन चुके हैं। इनमें ऐसी धुन सवार रहती है कि यदि उन्हें पता चलता है कि कहीं पर किसी मरीज को रक्त की जरूरत है, वैसे ही ये तत्काल मरीज के पास भगवान का दूसरा रूप बनकर पहुंच जाते हैं और समय पर रक्तदान कर जीवन बचाने का काम करते हैं।

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इन्हीं में एक हैं 37 वर्षीय *जयशंकर मरकाम, निवास ग्राम सेंदमुड़ा विकासखंड देवभोग जिला गरियाबंद छ.ग.* पेशे से कृषक तथा राजनीति क्षेत्र में भाजपा के सक्रिय जनसेवक है। वेे अब तक 46वीं बार रक्तदान कर चुके हैं।

जहां एक ओर बीलभद्र यादव भीष्म प्रतिज्ञा कर चुके है कि जब तक सामुदायिक स्वास्थ्य विभाग देवभोग में ब्लड बैंक की स्थापना नहीं हो जाती तब तक विवाह नहीं करेगें वहीं जयशंकर निरन्तर मरीजों को स्वास्थ्य लाभ देकर परिजनों के चेहरे मुस्कान की लहर दौड़ा रहे हैं।

रक्तदान कर अब तक कई जिन्दगियां बचाई है। अब उन्होंने मित्रों तथा रक्तदान के इच्छुक लोगों का एक ऐसा ग्रुप बनाया है जो जरूरत पड़ते ही हाजिर हो जाता है। सोशल मीडिया से जुड़े हैं सैकड़ों लोग

मरीज को सुलभ तथा शीघ्र रक्त उपलब्ध हो इसके लिए ‘ रक्तदान सेवा समिति छत्तीसगढ़ नाम से वाट्सअप ग्रुप बनाए हैं। इसमें रक्तदान के लिए तैयार रहने वाले करीब 250 लोग जुड़े हुए हैं। कभी भी किसी को रक्त की आश्यकता पडऩे पर ग्रुप में मैसेज छोड़ देते हैं और कुछ ही समय में रक्तदाता अस्पताल पहुंच जाते हैं। इसके अलावा रक्तदान वीर रक्तदान वीर नाम से फेसबुक पेज भी बनाया हुआ है।रखते है हर रक्तदाता का हिसाब-किताब

एक बार रक्तदान करने के बाद तीन माह तक दोबारा रक्तदान नहीं किया जा सकता। ऐसे में जयशंकर मरकाम रक्तदान करने वाले सभी रक्तदाताओं का एक रजिस्टर में हिसाब किताब रखते हैं। इसके साथ ही वे कब, किसने व किसको रक्तदान किया इसे भी रजिस्टर में लिखकर रखते हैं।

थैलेसीमिया पीडि़तों को रहती है रक्त की जरूरत

अस्पताल में गर्भवती महिलाओं, हादसे में घायलों तथा थैलेसीमिया पीडि़त बच्चों को रक्त की आवश्यकता रहती है। उन्हें इस ग्रुप के सदस्य तथा अन्य संस्था की ओर से रक्त उपलब्ध करवाया जाता है। जयशंकर मरकाम का कहना है कि कई बार ऐसी स्थिति होती है कि मरीज को रक्त की सख्त जरूरत रहती है। कुछ समय पहले एक गर्भवती महिला के प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्त बह गया था और शीघ्र ब्लड उपलब्ध करवाना था। जयशंकर मरकाम साथियों के साथ अस्पताल पहुंचे। सयम पर खून मिल जाने से उसकी जान बच गई।

हर ग्रुप के हैं रक्तदाता

नेगेटिव रक्त ग्रुप को लेकर अक्सर परेशानी रहती है। वहीं इस व्हाट्सएप्प ग्रुप में हर रक्त ग्रुप के रक्तदाता उपस्थित हैं। ऐसे में हर ग्रुप के मरीज को समय पर रक्त उपलब्ध करवा दिया जाता है।

*क्या कहते हैं रक्तदाता -*

मिलता है सुकून

46 बार रक्तदान कर चुके जयशंकर मरकाम का कहना है कि कई बार देखने को मिला है कि समय पर रक्त नहीं मिलने पर मरीज की जान चली गई। वे ऐसे मरीजों के स्वजन की पीड़ा को समझते हैं। इसलिए नियमित अंतराल में रक्तदान कर लोगों की जान बचाने की कोशिश करते हैं। इससे सुकून मिलता है। हर व्यक्ति को रक्तदान करना चाहिए। ये आपके लिए भी और दूसरों के लिए भी अच्छा रहता है।

*युवाओं को दे रहे प्रेरणा*-

जयशंकर मरकाम 46वीं बार रक्तदान कर चुके हैं। वे कहते है कि जब अपनों को रक्त की आवश्यकता पड़ती है और उन्हें नहीं मिलता है तो मैं उस समस्या को समझता हूं। इसलिए मैं रक्तदान करता हूं और समय पर जरूरतमंद के लिए रक्त की व्यवस्था करने की कोशिश करता हूं। वहीं युवा होने के नाते अन्य युवाओं को भी रक्तदान के लिए प्रेरित करता हूं, ताकि समय पर हर किसी को ब्लड मिल सके।

*रक्तदान के फायदे*-

– हर तीन महीने में एक बार रक्तदान करना चाहिए। इससे शरीर में आयरन की मात्रा संतुलित होती है।

– स्ट्रोक व हार्ट अटैक से भी बचाव होता है।

– वजन घटाने में मदद मिलती है।

– एक बार के रक्तदान से कम से कम तीन लोगों को नया जीवन मिलता है। इससे खुशी और मानसिक संतुष्टि मिलती है।

– शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोतरी होती है।

खासकर यह देखा गया है कि अत्यधिक दूरी होने पर रक्तदाता आने जाने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है किन्तु रक्तदान सेवा समिति छत्तीसगढ़ ग्रुप के सदस्य अपने खर्च पर नवरंगपुर, भवानीपटना, धर्मगढ़ , रायपुर तथा दूरस्थ अस्पताल जाकर रक्तदान कर मरीजों को स्वास्थ्य लाभ तथा परिजनों के चेहरे पर मुस्कान बिखकर आते है।

जनसेवा को ही अपना लक्ष्य निर्धारित कर स्वंय के साथ ही ग्रुप के सदस्यों के साथ ही युवा के लिए प्रेरणा बनकर कार्य कर रहे।

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